कोरोना से जंग जीतने वाले दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिक ने माना भारत का ‘लोहा’

कोरोना वायरस से लड़ाई को दक्षिण कोरिया ने बेहद कारगर तरीके से लड़ा है. एक समय पर वहां हर रोज सैंकड़ों मामले सामने आ रहे थे, लेकिन अब स्थिति नियंत्रित दिखाई देती है.


सियोल: कोरोना वायरस (Coronavirus) से लड़ाई को दक्षिण कोरिया ने बेहद कारगर तरीके से लड़ा है. एक समय पर वहां हर रोज सैंकड़ों मामले सामने आ रहे थे, लेकिन अब स्थिति नियंत्रित दिखाई देती है. खतरे की आहट के साथ ही कोरिया सरकार द्वारा पब्लिक और प्राइवेट लैब तैयार की गईं और बड़े पैमाने पर लोगों की जांच हुई. इस वजह से संक्रमितों को जल्द पहचाना और वायरस के फैलाव को सीमित किया जा सका. यहां कुल संक्रमित मरीजों में से करीब दो तिहाई ठीक हो चुके हैं. अब दुनिया के सभी देश कोरोना से जंग में ‘कोरिया मॉडल’ को अपनाने पर विचार कर रहे हैं. साथ ही कोरोना की वैक्सीन को लेकर भी प्रयास किये जा रहे हैं. इस बारे में इंटरनेशनल वैक्सीन इंस्टीट्यूट (IVI) के महानिदेशक डॉ. जेरोम किम का कहना है कि विश्व के 7 बिलियन लोगों के लिए किसी को तो वैक्सीन बनानी होगी और जल्द बनानी होगी.


WION के प्राइम टाइम शो ‘Gravitas’ के लिए चैनल की Executive Editor पलकी शर्मा उपाध्याय ने डॉ. जेरोम किम से कोरोना से युद्ध में दक्षिण कोरिया की सफलता सहित कई विषयों पर बात की. इस दौरान डॉक्टर किम ने भारत से प्रयासों की जमकर सराहना की. क्लीनिकल वैज्ञानिक और HIV वैक्सीन से जुड़े अमेरिकी सेना के अभियान के प्रमुख रहे डॉ. जेरोम किम ने कहा कि भारत को एक बड़ी भूमिका निभानी है, केवल अपनी आबादी के चलते नहीं बल्कि हम जानते हैं कि भारत का अपना बहुत महत्वपूर्ण वैक्सीन विनिर्माण उद्योग है. बड़े पैमाने पर टीकाकरण के लिए दुनिया भर में उपयोग किए जाने वाले लगभग 70% टीके भारत में बनाए जाते हैं. दुनिया में लगभग हर बच्चे को भारत में विकसित टीका लगा होगा और यह बेहद महत्वपूर्ण बात है.


उन्होंने आगे कहा, ‘इसका मतलब है कि भारतीय कंपनियां प्रति वर्ष एक अरब टीके विकसित करती हैं और हमें इस तरह की क्षमता की जरूरत है ताकि हम कोरोना की वैक्सीन को केवल अमेरिका और यूरोप ही नहीं दुनिया भर के ज़रुरतमंद लोगों तक पहुंचा सकें. हमें ऐसे कंपनियों की जरुरत है, जिनके पास बड़े पैमाने पर वैक्सीन तैयार करने की क्षमता हो साथ ही उन्हें यह भी पता हो कि वैक्सीन बनानी कैसे है’. आपनी बात को आगे बढ़ाते हुए डॉ. जेरोम किम ने कहा कि भारत में बेहतरीन  विश्वविद्यालय, बेहद प्रतिभाशाली एवं बुद्धिमान लोग और संपन्न जैव प्रौद्योगिकी उद्योग है और इन सभी संसाधनों को कोरोना से मुकाबले के लिए हथियार के तौर पर प्रयोग किया जा सकता है. भारत के पास इस 100 वर्षों की सबसे बड़ी महामारी से निपटने में योगदान करने के लिए काफी कुछ है.


डॉ. जेरोम ने संयुक्त राज्य और इटली में तेजी से बढ़ते मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी देश समय पर जांच प्रक्रिया शुरू करने, ट्रैक करने – आइसोलेट करने और उपचार प्रदान करने में सक्षम नहीं थे. डॉ. जेरोम के अनुसार, COVID 19 संक्रमण से पीड़ित 98% लोग अंततः ठीक हो जाते हैं. भारत की तैयारी पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत अभी शुरुआती चरण में है और सरकार जो कदम उठा रही है वे COVID 19 के प्रसार को सीमित करने में प्रभावी हो सकते हैं. इसमें ध्यानपूर्वक टेस्टिंग पर नजर रखना और इस बारे में केंद्र सरकार को सूचित करना अहम् है. क्योंकि केंद्रीय स्तर पर ही जानकारी को एकत्र करके, एक ही स्रोत से स्पष्ट संक्षिप्त और निर्णायक रूप में भारत के लोगों तक पहुँचाया जा सकता है.    


क्या है IVI?
1997 में स्थापित अंतर्राष्ट्रीय वैक्सीन इंस्टिट्यूट विश्व स्वास्थ्य संगठन और 35 देशों द्वारा हस्ताक्षरित संधि के अंतर्गत एक स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय संस्था के रूप में काम करता है. यह विश्व का एकमात्र संगठन है, जो दुनिया के सबसे गरीब लोगों की रक्षा के लिए केवल नए और बेहतर वैक्सीन विकसित और पेश करने के लिए समर्पित है.  


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