कोरोना से पहले कई महामारियों ने ली करोड़ों लोगों की जानें, यह है इनका इतिहास


कोविड-19 महामारी अब तक दुनिया में 27 लाख से ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में ले चुकी है। वैश्विक महामारी घोषित होने के बाद भी कई देशों ने कोरोना से लड़ने के लिए देर से रणनीति अपनाई। कोरोना अकेली ऐसी बीमारी नहीं है जिसने दुनिया को हिला कर रख दिया हो। 
कोरोना ने एक बार फिर महामारियों के परिणामों को चर्चा में ला दिया है। इससे पहले भी कई ऐसी बीमारी रही है जिन्होंने मानव समाज और सरकारों को अलग आकार दिया है। 6वीं शताब्दी के जस्टिनियन प्लेग से लेकर 20वीं शताब्दी के स्पेनिश फ्लू तक कई बीमारियों ने समाज में उथल-पुथल पैदा की थी। आइए जानते हैं ऐसी महामारियों के बारे में...


जस्टिनियन प्लेग (Justinian Plague)
यह महामारी अब तक इतिहास में सबसे घातक बीमारी मानी जाती है। इस बीमारी की उत्पत्ति 6वीं शताब्दी में मिस्र में हुई थी जो तेजी से पूर्वी रोमन साम्राज्य में फैली थी। इस प्लेग का नाम पूर्वी रोमन साम्राज्य के तात्कालिक सम्राट जस्टिनियन के नाम पर 'जेस्टिनियन प्लेग' पड़ा।


इस महामारी की चपेट में आकर लगभग 2.5 से 10 करोड़ लोग मारे गए थे। उस समय रोमन साम्राज्य में इटली, रोम और उत्तरी अमेरिका समेत पूरा भूमध्यसागरीय तट शामिल थे। 750 ईसवीं तक प्लेग के लगातार प्रकोप से पूर्वी रोमन साम्राज्य आर्थिक रुप से कमजोर होता गया।


जब रोमन साम्राज्य से प्लेग खत्म हुआ तब तक इस साम्राज्य ने यूरोप में जर्मन-भाषी फ्रैंक्स क्षेत्र को खो दिया था और मिस्र और सीरिया अरब साम्राज्य के नियंत्रण में आ गए थे। 


ब्लैक डेथ (Black Death)
ब्लैक डेथ भी खतरनाक महामारियों में से एक है। 14वीं शताब्दी के दौरान इस महामारी का असर यूरोप और एशिया जैसे बड़े महाद्वीपों में रहा। इतिहास गवाह है कि ब्लैक डेथ से सबसे ज्यादा मानव सभ्यता को नुकसान हुआ। ब्लैक डेथ ने लगभग 7.5 से 20 करोड़ लोग मारे गए थे। 


ब्लैक डेथ की शुरुआत 1340 के शुरू के दशक में हुई थी। इस महामारी से चीन, भारत, सीरिया और मिस्र काफी ज्यादा प्रभावित हुआ था और 1347 आते आते ये बीमारी यूरोप तक फैल गई थी। ब्लैक डेथ की वजह से यूरोप की लगभग 50 फीसद आबादी खत्म हो गई थी। 


इस महामारी के लिए यूरोप में यहूदियों को जिम्मेदार ठहराया गया था और यहीं से यूरोप में यहूदियों के उत्पीड़न की शुरुआत हुई थी। ब्लैक डेथ के बाद कैथोलिक चर्च का असर कम हो गया था और लोगों के भगवान के साथ संबंधों को चुनौती दी गई थी। 


स्पैनिश फ्लू (Spanish Flu)
पहले विश्व यूद्ध के अंतिम चरण के दौरान स्पैनिश फ्लू महामारी का प्रभाव रहा। यह 20वीं शताब्दी की सबसे घातक महामारी थी जिसमें लगभग पांच करोड़ लोगों की मौत हो गई थी। स्पैनिश फ्लू का कहर सबसे पहले यूरोप में देखा गया जो बाद में अमेरिका और एशिया में तेजी से फैला। 


इसके अलावा भारत में भी स्पैनिश फ्लू का कहर देखने को मिला था। देश में उस समय इस महामारी से लगभग 1.7 से 1.8 करोड़ लोगों की मौत हुई थी। महामारी का सबसे ज्यादा असर पहले विश्व युद्ध के परिणाम पर रहा। फ्लू से विश्व युद्ध में शामिल दोनों तरफ के लोग मारे गए थे लेकिन जर्मन और ऑस्ट्रियाई सेनाएं इससे सबसे ज्यादा प्रभावित थी।


कोरोना वायरस (COVID-19)
कोविड-19 या कोरोना वायरस पिछले साल 2019 में शुरू हुई महामारी है। चीन के वुहान शहर के वेट मार्केट से इसकी उत्पत्ति मानी जाती है। कोरोना वायरस ने दुनिया में अब तक 27 लाख से ज्यादा लोगों को संक्रमित कर दिया है। इस बीमारी से 1,90,000 से ज्यादा लोगों की मौत भी हो चुकी है। 


कोरोना वायरस की सबसे खतरनाक बात यह है कि इसके लक्षण बदलते जा रहे हैं। शुरुआत में खांसी, जुकाम, बुखार और सांस लेने में दिक्कत इसके लक्षण बताए गए थे लेकिन अब ये लक्षण ना होने पर भी मरीजों में कोरोना वायरस की पुष्टि की गई है।


 


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