क्यों दुनिया का सबसे रहस्यमयी देश है उत्तर कोरिया

उत्तर कोरिया (North Korea) में सरकार का हर चीज पर नियंत्रण है. स्थिति यह है कि किम जॉन्ग उन जो चाहते हैं वही दुनिया जानती है. देश के भीतर के हालात बेहद भयावह हैं. 



किम जॉन्ग उन (Kim Jong Un) के नेतृत्व वाला उत्तर कोरिया (North Korea) एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है. चर्चा का कारण भी किम जॉन्ग ही हैं. उन्हें लेकर खबरें फैल गई हैं कि वो तकरीबन मरणासन्न अवस्था में पहुंच चुके हैं. उनकी बहन उत्तर कोरिया की सत्ता पर काबिज हो सकती हैं. लेकिन इन खबरों का पड़ोसी देश दक्षिण कोरिया ने खंडन भी किया है.

कुल मिलाकर अभी कोई तस्वीर स्पष्ट नहीं है. और ऐसा पहली बार नहीं है जब उत्तर कोरिया की किसी खबर को लेकर असमंजस हो. दरअसल पूरे उत्तर कोरिया का राजनीतिक चरित्र ही ऐसा गढ़ दिया है कि खबरें बाहरी दुनिया तक टूट-फूट कर या फिर गलत तरीके से पहुंचती हैं.


लंबे समय में बनाई गई छवि
दरअसल उत्तर कोरिया की ये रहस्यमयी छवि काफी सालों में निर्मित हुई है और इसको गढ़ने में खुद किम जॉन्ग उन बड़े जिम्मेदार रहे हैं. वर्तमान कम्यूनिस्ट उत्तर कोरिया की बात करें तो इसे किम जॉन उन के दादा किम सुंग ने बनाया था. 1948 में जापान के कब्जे से मुक्त होने के बाद उत्तर कोरिया पर किम सुंग ने 1994 तक शासन किया. वो दुनिया में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले नेताओं में शुमार किए जाते हैं.


सोवियत विघटन के बाद शुरू हुए देश के दुर्दिन
सोवियत के जबरदस्त समर्थक और कम्यूनिस्ट उत्तर कोरिया के शासक सुंग ने देश को प्लान्ड इकॉनमी दी. एक वक्त था जब दक्षिण कोरिया के मुकाबले उत्तर कोरिया कहीं ज्यादा विकसित था. लेकिन फिर सोवियत के टूटने के बाद देश के हालात अस्थिर हुए तो आज तक नहीं संभले. सुंग के बाद उनके बेटे किम जॉन्ग इल 1994 से लेकर 2011 में अपनी मौत तक देश के शासक रहे. फिर आया किम जॉन्ग उन का शासन काल.

किम जॉन्ग के आने से पहले भी था नियंत्रण
किम जॉन्ग उन के सत्ता में आने के पहले भी उत्तर कोरिया में मीडिया के हालत बेहद खराब थी. अन्य कम्यूनिस्ट स्टेट्स की तरह यहां भी स्वतंत्र मीडिया पर पाबंदी थी. किम जॉन्ग उन ने इस पाबंदी को रहस्य में तब्दील कर दिया. अक्सर उत्तर कोरिया से अजीबोगरीब खबरें बाहर आने लगीं जो खबरों से से ज्यादा टेरर कायम करने का तरीका ज्यादा लगती थीं. जैसे किम जॉन्ग की मीटिंग में कोई सो रहा था और फिर उसे गोली मरवा दी गई. नीले कलर की जींस पहनने पर पाबंदी होना और न जाने ऐसी कितनी खबरें.

हर नागरिक पर सरकारी निगाहें
किम जॉन्ग उन का अपने देश के मीडिया पर जबरदस्त नियंत्रण है. यहां तक कि सरकार यह भी जानकारी रखती है कि देश के लोग बाहरी देशों के बारे में क्या राय रखते हैं. दुनिया में अपनी एंटी अमेरिका छवि के लिए पहचाने वाले किम जॉन्ग की देश आर्थिक हालत बेहद खराब है. हजारों की संख्या में वैचारिक विरोधी जेल में सड़ रहे हैं. आम व्यक्ति की जिंदगी के हर पक्ष पर सरकार का कब्जा है.

बेहद बुरे हैं देश के हालात
बाल मजदूरी उत्तर कोरिया में सबसे आम प्रचलन की बुराई है. बड़ी संख्या में बच्चों को खेतों में काम करना पड़ता है. बिजनेस इनसाइडर पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक देश का ज्यादातर आर्थिक उत्पादन बंधुआ मजदूरी पर आधारित है. बच्चों में कुपोषण सबसे बड़ी समस्या है. एक डेटा के मुताकि देश में 5 साल से कम उम्र के करीब 28 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं. भुखमरी और गरीबी का आलम ये है कि देश की करीब 41 प्रतिशत आबादी कुपोषित है.


2015 में पूरा उत्तर कोरिया घूमने वाले एक फोटो जर्नलिस्ट ने कहा था कि उन्हें मुश्किल से कहीं मोटे लोग दिखाई दिए. सामान्य तौर पर बेहद पतले या कह सकते हैं कुपोषित और कमजोर लोग ही दिखाई देते हैं.

पूरी दुनिया से देश को किया गया अलग-थलग
इस भयावह स्थिति को छिपाने के लिए किम जॉन्ग की सरकार ने देश में इंटरनेट की सुविधा बहुत सीमित संख्या में रखी है. बेहद कम जगहों पर इंटरनेट एक्सेस दिया जाता है. उस पर भी सरकार की निगाहें बनी रहती हैं. इतनी सख्ती की वजह से उत्तर कोरिया के लोग एक तरीके से बाकी दुनिया से बिल्कुल कट गए हैं. ऐसा ही बाहरी दुनिया के बारे में भी कहा जा सकता है. देश से जानकारी वो ही बाहर आती है जो किम जॉन्ग उन देना चाहते हैं.

परिवार के बारे में भी जानकारी नहीं
उत्तर कोरिया की सरकार रहस्यमयी स्थिति का अंदाजा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है कि किम जॉन्ग की बहन सरकार का अहम हिस्सा तो हैं लेकिन उनके बारे में वैश्विक मीडिया में बेहद कम जानकारी मौजूद हैं. किम जॉन्ग सबसे ज्यादा प्रचार अपनी मिलिट्री का करते हैं. अक्सर उत्तर कोरिया की बड़ी परेडों की तस्वीरें मीडिया में आती हैं. लेकिन दुखद पहलू यह है कि मिलिट्री वालों के साथ देश में बेहद क्रूर व्यवहार किया जाता है. मीडिया में ऐसी खबरें आई हैं कि जो सेना की नौकरी छोड़ने का प्रयास करता है उसका बुरा अंत किया जाता है.



दरअसल दादा किम सुंग के समय में मीडिया पर जो नियंत्रण स्थापित किया गया था उसे किम जॉन्ग उन ने आखिरी सीमा पर पहुंचाया है. ऐसी स्थिति में उत्तर कोरिया के बारे में सटीक जानकारी पाने का एकमात्र तरीका दक्षिण कोरिया है. उत्तर कोरिया के बारे में सामान्य तौर दक्षिण कोरियाई जानकारियों पर ही भरोसा किया जाता है.


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