कोरोना से लड़ने में कितनी कारगर होंगी कैंसर, अवसाद और बीपी की दवाएं, चल रहा ट्रायल


कोरोना मरीजों की संख्या और बिगड़ते हालात को देख अब डॉक्टर उस हर दवा से इलाज करने की कोशिश में लगे हैं, जिनका प्रयोग अभी दूसरी गंभीर बीमारियों के इलाज में हो रहा है। इसमें सबसे अहम कैंसर, ब्लड प्रेशर, अवसाद की दवाएं शामिल हैं। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि इन दवाओं के प्रयोग से वायरस पर काबू पाया जा सकता है। वायरस से फेफड़ों को जो नुकसान हो रहा है उसे रोका जा सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन बीमारियों की दवा से वायरस को फेफडे़ की बाहरी सतह में जाने से रोका जा सकता है।


कैंसर की दवा: रक्सोलिटिनिब (Ruxolitinib)


बोनमैरो कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा रक्सोलिटिनिब पर वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन में क्लीनिकल ट्रायल चल रहा हैै।
विशेषज्ञों का कहना है कि इससे सूजन नहीं आती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता संतुलित रहती है।    
ये दवा कुछ कैंसर कोशिकाओं को भी मारती है। जब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपनी ही कोशिकाओं और उत्तकों के खिलाफ काम करने लगती है उसे ये दवा रोक सकती है।


ओसीडी की दवा : फ्लूवॉक्सामाइन (Fluvoxamine)


मानसिक रोग (ओसीडी) व अवसाद के इलाज में इस्तेमाल होने वाली फ्लूवॉक्सामाइन दवा से भी वैज्ञानिकों को उम्मीद है। बॉस्टन यूनिवर्सिटी में इस पर शोध चल रहा है।
शोध के अनुसार ये दवा मस्तिष्क में सेरोटोनिन नाम के न्यूरोट्रांसमीटर का संतुलन बनाकर रखती है जो मूड सही रखने का काम करती है।
इस दवा में मौजूद प्रोटीन से सूजन पर भी नियंत्रण होता है जिससे उम्मीद  लगाई जा रही है कि ये रोग प्रतिरोधक क्षमता को संतुलित रखने के साथ सांस फूलने की तकलीफ में फायदा पहुंचा सकती है।


रक्तचाप की दवा : लोसार्टन (Losartan)


यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा के वैज्ञानिक संक्रमण के इलाज में ब्लड प्रेशर की दवा लोसार्टन पर भी मंथन कर रहे हैं।
ये दवा शरीर में उस तत्व को प्रतिबंधित करने का काम करती है जिसके कारण रक्त वाहिकाएं सिकुड़ने लगती हैं और तकलीफ बढ़ती है।
वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि ये दवा वायरस के रिसेप्टर को ब्लॉक कर देगी और पूरे शरीर में उसे फैलने से रोक सकती है।


कोरोना वायरस के इलाज के लिए अबतक कोई प्रॉपर दवा नहीं बन पाई है। हालांकि विभिन्न देशों में इसकी दवा तैयार करने में वैज्ञानिक शोधरत हैं। लेकिन जबतक कोरोना की दवा नहीं आ जाती, तबतक पहले से उपलब्ध विभिन्न बीमारियों की दवा में वैकल्पिक उम्मीद ढूंढी जा रही है। हालांकि कैंसर, बीपी और मानसिक अवसाद की दवाएं कोरोना के इलाज में कितनी कारगर होंगी, यह ट्रायल के बाद पता चल पाएगा। अगर सकारात्मक परिणाम सामने आए तो कोरोना से जंग में ये दवाएं बड़ी राहत पहुंचाएगी।