मप्र / राज्य की आय में सात हजार करोड़ की कमी, सिर्फ एक तिहाई रह गई, शिवराज सिंह चौहान

  • मार्च-अप्रैल में 12662 करोड़ आय होनी थी, लेकिन 4 हजार करोड़ भी नहीं मिले

  • लॉकडाउन ने सभी राज्यों के साथ मप्र की आय का भारी नुकसान हुआ है



 मप्र / लॉकडाउन ने सभी राज्यों के साथ मप्र की आय का भारी नुकसान हुआ है। राज्य की औसतन हर माह आय 6331 करोड़ रुपए होती है, लॉकडाउन के कारण यह आय एक तिहाई रह गई है। मार्च, अप्रैल माह के कारोबार, शराब बिक्री, पंजीयन व अन्य माध्यम से सरकार को 12662 करोड़ की आय होना थी लेकिन सरकार को चार हजार करोड भी नहीं मिले हैं। हालत इससे समझ सकते हैं कि जीएसटी से हर माह दो हजार करोड़ रुपए मिलते हैं, मई में सरकार को केवल 200 करोड़ रुपए मिले हैं। वहीं सरकार को हर माह 3500 करोड़ रुपए का स्थाई खर्च वेतन व पेंशन के तौर पर करना ही होता है। जीएसटी लागू होने के बाद सरकार के बाद पेट्रोल-डीजल व शराब पर टैक्स बढाने के साथ ही स्टाम्प व पंजीयन शुल्क बढाने का ही विकल्प है, अन्य आय के संसाधन नहीं बचे हैं। दिल्ली, तमिलनाडु, राजस्थान, नागालैंड व अन्य राज्यों ने टैक्स बढा भी दिया है। 


इस तरह हुआ सरकार को नुकसान- जीएसटी में 2900 करोड़ का नुकसान
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 अप्रैल 2019 में राज्य को जीएसटी से करीब 1900 करोड़ मिले थे, जो इस बार केवल 900 करोड़ मिले, इसी तरह मई माह में 2100 करोड़ मिलने थे लेकिन मात्र 200 करोड़ मिले। यानि सीधे 2900 करोड़ का नुकसान
पेट्रोल-डीजल में 600 करोड़ नुकसान
- अप्रैल-मई में सरकार को करीब 1200 करोड़ मिलते हैं, लेकिन इस बार मात्र 600 करोड़़ मिले। 
आबकारी में 1800 करोड़ का नुकसान
-शराब की बिक्री ठेके व वैट से से शासन को मार्च व अप्रैल में कुल 3263 करोड़ मिलने थे, लेकिन मिले केवल 1463 करोड़, 1800 करोड़ का नुकसान 
स्टाम्प, परिवहन, बिजली शुल्क व अन्य आय से 800 करोड़ का नुकसान
 पंजीयन विभाग से हर माह औसतन 541 करोड़ की, परिवहन से 333 करोड़ की, बिजली शुल्क से 250 करोड रुपए मिलते हैं। इससे 150 करोड़ भी नहीं मिले हैं। यानि 800 करोड़ से ज्यादा का नुकसान।
खनिज, वन, सिंचाई की करेत्तर आय में भी नुकसान
हर माह  खनिज, वन व सिंचाई से औसतन एक हजार करोड़ की कमाई होती है, जो लगभग ठप हो गई है। 


इस तरह होती है सरकार की कमाई
(बजट में बताए गए स्त्रोत के अनुसार शासन को हर साल राज्य के करों, शुल्कों (कर के अतिरिक्त आय) के तौर पर करीब 78 हजार करोड़ की आय होती है। यानि हर माह औसतन 6331 करोड़ रुपए। )

- जीएसटी, विलासित कर आदि से- 36 हजार करोड़ (हर माह 3000 करोड़ रुपए)
- आबकारी - 13000 करोड़ ( 1083 करोड़ हर माह)
- स्टाम्प पंजीयन- 6500 करोड़ ( 541 करोड़ हर माह)
- परिवहन आरटीओ से - 4000 करोड़ (333 करोड़ हर माह)
- भू राजस्व से - 500 करोड़ ( 41.66 करोड़ हर माह)
- बिजली शुल्कों से- तीन हजार करोड करीब (250 करोड़ हर माह)
- खनिज, वन व सिंचाई से करेत्तर राजस्व- करीब 13 हजार करोड़ ( 1083 करोड़ हर माह) 
औसतन हर माह - 6331 करोड की आय होती है


सरकार के राजस्व का गणित
बजट के अनुसार मप्र शासन की कुल आय 2.14 लाख करोड़ (राजस्व करीब 1.79 और पूंजीगत 35 हजार करोड करीब) है। इसमें राज्य के कर व करेत्तर राजस्व में 78 हजार करोड़, कर्ज 28 हजार करोड़, केंद्रीय करों में हिस्सा 63 हजार करोड़, सहायता अनुदान केंद्र से 36 हजार करोड़ व अन्य चार हजार करोड़ आय होती है। 
संकट मई माह में और बढ़ेगा
इससे बड़ा संकट मई माह में आने वाला है, कारण है कि मार्च में कुछ दिन कारोबार के चलते अप्रैल में सरकार को फिर भी राजस्व आया पर अप्रैल में पूरी तरह कारोबार का असर सीधा जीएसटी पर दिख रहा है। पेट्रोल-डीजल से भी आय 30 फीसदी रहने की आशंका है।


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