मप्र / गिट्‌टी, मुरम की रॉयल्टी दर ढाई गुना तक बढ़ी, मकान बनाना महंगा

  • नए साल में राजस्व बढ़ाने सरकार ने लिए दाे बड़े फैसले,जल्द जनता पर दिखेगा इनका असर

  • सरकार का राजस्व अब 900 से 1000 करोड़ हो जाएगा, सरकार ने माइनर मिनरल की नई दरें 1 जनवरी से लागू कीं

    खनिज संसाधन विभाग ने कंस्ट्रक्शन में इस्तेमाल होने वाले गिट्‌टी, ग्रेनाइट, मुरम, फर्शी पत्थर आदि की रॉयल्टी दरें दो से ढाई गुना तक बढ़ा दी हैं। इस फैसले का सीधा असर इन खनिजों के बाजार मूल्य पर पड़ेगा, जिससे सड़क से लेकर मकान निर्माण तक की लागत बढ़ना तय है। नई दरें एक जनवरी से लागू हो चुकी हैं। इसके लिए गौड़ खनिज नियम 1996 में संशोधन किया गया है। गौड़ खनिजों से राज्य सरकार काे सालाना लगभग 900 करोड़ रुपए का राजस्व मिलता है। दरें बढ़ने से यह राजस्व एक हजार करोड़ रुपए के पार चला जाएगा। 


    बाजार पर असर
    विभाग के मुताबिक नई दरों का बाजार में तीन माह बाद असर दिखेगा। क्योंकि खनन से लेकर उपभोक्ता तक पहुंचने में खनिजों को कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। इसलिए अभी ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।


    इन खनिजों की रॉयल्टी दरें बढ़ीं


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    लीज के बाद खदान बंद रखना पड़ेगा महंगा
    विभाग ने सभी गौड़ खनिज खदानों का डेड-रेंट लगा दिया है। यानी खदान लीज पर लेने के बाद यदि बंद रही तो भी सालाना अनिवार्य भाटक देना पड़ेगा। ग्रेनाइट, डोलेराइट, संगमरमर, लाइम स्टोन और फ्लैग स्टोन की खदानों के लिए यह डेड-रेंट 2 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर सालाना होगा। जबकि क्रेशर के पत्थर, रेत, बजरी, मुरम और खंडा समेत अन्य गौण खनिजों की खदानों का डेड-रेंट एक लाख रुपए होगा।


    राजस्व बढ़ोतरी के लिए जरूरी कदम
    लंबे वक्त के बाद गौड़ खनिजों की रॉयल्टी दर बढ़ाई गई है। राजस्व बढ़ोतरी के लिए यह जरूरी कदम हैं। लेकिन इससे कंस्ट्रक्शन मटेरियल की कास्टिंग पर फिलहाल 2-3 माह तक ज्यादा असर नहीं आएगा।
    - विनीत कुमार आस्टिन, डायरेक्टर, माइनिंग