भोपाल / खनिज मंत्री ने कहा- कंप्यूटर बाबा को न तकनीकी ज्ञान है और न वे वैज्ञानिक; फिर किसके इशारे पर छापे मार रहे

  • प्रदीप जायसवाल ने कहा - बाबा अवैध खनन रोकने के नाम पर खनिज विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों पर दबाव बना रहे हैं

  • भाजपा प्रवक्ता ने कहा- रेत के बंदरबांट पर कमलनाथ सरकार और सत्ता में बैठे लोगों का पूरा ध्यान है

    खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल ने नर्मदा सेवा न्यास के अध्यक्ष कंप्यूटर बाबा पर निशाना साधा है के लिए इमेज नतीजेभोपाल . खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल ने नर्मदा सेवा न्यास के अध्यक्ष कंप्यूटर बाबा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जब खनिज विभाग अवैध खनन रोकने मे सक्षम हैं तो बाबा किसके इशारे पर छापा मार रहे हैं। वह भी ऐसी खदानों पर जो वैध है। दरअसल, बाबा अवैध खनन रोकने के नाम पर खनिज विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों पर दबाव बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाबा को न तो ज्ञान है तकनीक का और न ही वैज्ञानिक है। बावजूद इसके वे किसके इशारे पर छापेमार कार्रवाई कर रहे हैं। जायसवाल ने कहा कि यह जरूरी नहीं है कि बाबा जिस खदान पर जा रहे हैं वह अवैध हो। पंचायतों ने जो ठेके दिए हैं वह वैध है।


    अफसरों पर दबाव बनाकर प्रकरण दर्ज कराने का काम हो रहा है। जायसवाल शनिवार को मीडिया से चर्चा कर रहे थे। उन्होंेने कहा कि कई बार पंचायत की स्वीकृत खदानों पर पहुंच जाते हैं। स्वीकृत खदानों पर ट्रैक्टर ट्राली खड़े होना कोई नई बात नहीं है। बाबा की इन कार्रवाइयों से विभाग को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा 1 अप्रैल से प्रदेश में नई खनिज नीति से रेत खनन का काम होगा। 


    सीएम बताएं- बाबा किसके इशारे पर मार रहे हैं छापा 
    भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राजपाल सिंह सिसोदिया ने कहा कि रेत के उत्खनन व विवादों से लग रहा है कि कमलनाथ सरकार और सत्ता में बैठे लोगों का पूरा ध्यान सिर्फ रेत की बंदरबांट पर है। सरकार के मंत्री एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस के विधायक खुद को रेत माफिया के सामने असहाय बताते हैं। खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल नदी न्यास के अध्यक्ष कंप्यूटर बाबा की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री को यह बताना चाहिए कि कंप्यूटर बाबा किसके इशारे पर कार्रवाई कर रहे हैं? अगर वे नदियों का जीवन बचाने के लिए छापे मार रहे हैं, तो खनिज मंत्री को आपत्ति क्यों है?


    पूर्व मंत्री श्री विश्वास सारंग जी ने कहा कि-


    कम्प्यूटर बाबा का अवैध रेत उत्खनन पर सवाल उठाना सही है। मप्र में कांग्रेस की सरकार  में मंत्री स्वयं मुख्यमंत्री के निर्णय पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं। एक दूसरे के व्यवहार में घर्षण मप्र के विकास को रोक रहा है। ।


    कमलनाथ सरकार किसी भी तरह शिक्षा पर अपना अधिकार करना चाहती है। विगत डेढ़ साल में मप्र सरकार ने शिक्षा के लिए कुछ भी काम नहीं किया चाहे कुलपति की नियुक्ति हो या कोई अन्य फ़ैसला यह सरकार संविधान की धज्जियाँ उड़ा रही है और अपना आधिपत्य जमाना चाहती है।


    कम्प्यूटर ऑपरेटरों को नियमित करने की बात तो कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में कही थी। इसपर अमल होना चाहिए।


    कांग्रेस की सरकार घोर आर्थिक अनुशासनहीनता के दौर से गुज़र रही है। एक समानांतर अर्थव्यवस्था चल रही है। केंद्र सरकार से पैसा मिलने की योजना के नियमों का पालन मप्र सरकार ने नहीं किया है। यही कारण है कि प्रदेश में पैसे की कमी हुई है। 


    डेढ़ साल में दीपक बावरिया जी ने अपने लोगों को उपकृत करने के लिए कितने पत्र लिखे हैं, इस बात की जाँच भी होनी चाहिए। जब मप्र में मंत्री मुख्यमंत्री की नहीं सुनते तो बावरियाजी की कौन सुनेगा ?


     




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