किसकी सलाह पर सोनिया गांधी ने मीडिया विरोधी सुझाव दिया, बढ़ी कांग्रेस की मुसीबत

उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। इसमे लल्लू ने मुख्यमंत्री से पत्रकारों को मास्क, सैनिटाइजर उपलब्ध कराने, उनका 25 लाख रुपए का जीवन बीमा कराने की मांग की है।


लल्लू का यह पत्र कांग्रेस पार्टी के कई नेताओं के बीच में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह पत्र कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे पत्र से भी जोड़कर देखा जा रहा है


जिसमें उन्होंने मीडिया के विज्ञापन रोकने का सुझाव पीएम को दिया था। कांग्रेस पार्टी के ही एक बड़े नेता को समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर किसने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को ऐसी सलाह देकर पार्टी की मुसीबत बढ़ा दी है।


ध्यान रहे कि प्रिंट और टीवी पत्रकारिता के देश के सबसे बड़े दोनों संगठनों (आईएनएस और एनबीए) ने सोनिया गांधी के इस सुझाव की तीखी आलोचना की है।


सूत्र का कहना है कि मार्च के आखिरी सप्ताह में भी इसी तरह की घटना हुई थी। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पहले कोविड-19 का संक्रमण रोकने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा किए गए प्रयास की तारीफ की थी, लेकिन इसके कुछ दिन बाद ही उन्होंने लॉकडाउन को लेकर आलोचना की थी। कांग्रेस अध्यक्ष ने लॉकडाउन को गलत तरीके से लगाए जाने की बात कहते हुए इस पर सवाल उठाया था। इस पर केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बाकायदा पलटवार किया था।



मीडिया का विज्ञापन रोकने का सुझाव देने की जरूरत क्या थी?


पार्टी के नेता का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष ने सात अप्रैल को प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने प्रधानमंत्री से केन्द्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों से प्रिंट, इलेक्ट्रानिक मीडिया में विज्ञापन देने पर रोक लगाने का आग्रह किया है। सूत्र का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष की यह सलाह कई राज्य में कांग्रेस के नेताओं के लिए परेशानी का सबब बन रही है। उत्तर प्रदेश से जुड़े पार्टी के एक नेता ने अजय कुमार लल्लू का पत्र साझा करते हुए कहा कि परेशानी से निबटने के लिए अब इस तरह से प्रयास किया जा रहा है। पूर्व राज्यसभा सदस्य का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष प्रधानमंत्री को विज्ञापन रोकने का सुझाव देकर मीडिया से बैर ले रही हैं और हमारे प्रदेश अध्यक्ष को इस तरह से मीडिया प्रेम दिखाना पड़ रहा है।


आखिर यह सलाह कौन दे रहा है?


कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता लॉकडाउन के चलते इस समय बंगलूरू में ही अटके हैं। उन्हें भी पार्टी अध्यक्ष के इस तरह के बयान, सुझाव पर आश्चर्य हो रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अनौपचारिक बातचीत में उन्होंने कहा कि वह भी जानने की कोशिश कर रहे हैं कि इसमें किसकी भूमिका है। पार्टी के एक अन्य पूर्व महासचिव ने कहा कि उनके पास भी यह बात आई। उन्हें सब पता है। मानते हैं कि यह सुझाव समय और स्थिति के थोड़ा अनुकूल नहीं है, लेकिन कभी कभी ऐसा हो जाता है। एक अन्य नेता ने कहा कि हम विपक्ष हैं। हमारा काम केन्द्र सरकार की नीतियों की तरफ उसका ध्यान आकर्षित करना है, लेकिन लग रहा है कुछ चूक हो गई।


पीएम से चर्चा में कांग्रेस शासित राज्यों ने किया लॉकडाउन का समर्थन


सूत्र का कहना है कि 11 अप्रैल को प्रधानमंत्री और देश के मुख्यमंत्रियों की वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए हुई चर्चा में कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने एक सुर में न केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को कोविड-19 से निबटने में सही कदम उठाने के लिए धन्यवाद दिया, बल्कि लॉकडाउन का समर्थन भी किया। मुख्यमंत्रियों ने प्रधानमंत्री से लॉकडाउन को बढ़ाने की सिफारिश भी की। पार्टी के पूर्व महासचिव ने माना कि संसद में दलों के नेताओं के साथ प्रधानमंत्री की चर्चा में गुलाम नबी आजाद ने भी पार्टी के सकारात्मक-सहयोगी रुख को सामने रखा।


क्या है कोविड-19 पर कांग्रेस पार्टी की नीति


कोविड-19 पर कांग्रेस पार्टी की नीति स्पष्ट है। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 12 फरवरी से ही केन्द्र सरकार से इस पर विशेष ध्यान देने का आग्रह कर रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फोन किया था। कांग्रेस अध्यक्ष ने फोन पर प्रधानमंत्री को कोविड-19 का संक्रमण रोकने में पार्टी का पूरा सहयोग देने का वादा किया। कांग्रेस राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने भी प्रधानमंत्री को यही आश्वासन दिया है। पार्टी का मानना है कि कोविड-19 पूरी दुनिया के लिए बड़ी त्रासदी बनकर उभरी है। देश भी आपातकाल के दौर से गुजर रहा है। यह समय राजनीतिक एकता को दिखाते हुए संक्रमण से मुक्ति पाने का है। इसलिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने पिछले काफी समय से आरोप-प्रत्यारोप बंद कर दिया है। इसको लेकर राहुल गांधी भी काफी संवेदनशील हैं।


 


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