क्या हर 100 साल में दुनिया में फैली हैं महामारी? वायरल मैसेज में दावा- प्लेग 1720 में, हैजा 1820 में, स्पैनिश फ्लू 1920 में और कोविड-19 2020 में


कोविड-19 महामारी (कोरोना वायरस संक्रमण) से लगभग पूरी दुनिया जूझ रही है। दुनिया में 40 लाख से ज्यादा लोग इससे संक्रमित हो चुके हैं, जबकि 2.7 लाख से ज्यादा लोग इससे अपनी जान गंवा चुके हैं। चीन के वुहान में कोविड-19 का पहला केस सामने आया था और उसके बाद कुछ महीनों में यह महामारी लगभग पूरी दुनिया में फैल गई।


इस बीच एक मैसेज सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप पर काफी शेयर किया जा रहा है। इस मैसेज में दावा किया गया है कि हर 100 साल पर इस तरह से महामारी फैलती है। मैसेज में दावा किया गया है कि 1720, 1820, 1920 और अब 2020 में इस तरह से महामारी फैली है।


1720 में दुनिया में प्लेग फैला, 1820 में हैजा, 1920 में स्पैनिश फ्लू और अब 2020 में कोविड-19 महामारी। मैसेज में लिखा गया है कि यह किसी तरह का इत्तेफाक या इसके पीछे कोई रहस्य छिपा हुआ है। चलिए एक नजर डालते हैं कि इस वायरल मैसेज में किए गए दावे कितने सही और कितने गलत हैं। 


इस मैसेज में लिखा गया है, 'पिछली चार सदियों से हर 100 साल पर अलग-अलग महामारियों ने दुनिया पर हमला किया है और हर बार लाखों लोगों को बेमौत मार गई हैं यह महामारियां। हर बार हमने इन महामारियों का इलाज ढूंढ़ने में इतनी देर कर दी कि बहुत देर हो गई। पिछले 400 साल से एक ऐसी महामारी आती है, जो पूरी दुनिया में तबाही मचा कर जाती है। यह महज संयोग है या इसके पीछे भी छिपा है कोई रहस्य।'


क्या है इन दावों का सच


प्लेगः 1720 में पूरी दुनिया में प्लेग फैला था। 1720 की शुरुआत में साउदर्न फ्रांस में करीब 1.26 लाख लोग प्लेग की वजह से अपनी जान गंवा बैठे थे। प्लेग का कहर 1720 से 1722 के बीच देखने को मिला था। इसे ग्रेट प्लेग ऑफ मार्सिले कहा जाता है, मार्सिले फ्रांस का एक शहर है, जहां इस महामारी से सबसे ज्यादा लोगों ने जान गंवाई थी। 


हैजाः मैसेज में दावा किया गया है कि हैजा 1820 में फैला था, जबकि असल में यह महामारी 1817 में फैली थी। रॉबर्ट वुड जॉनसन फाउंडेशन के मुताबिक यह महामारी 1817 से कोलकाता से फैली थी। हैजा 1820 नहीं बल्कि उससे तीन साल पहले फैला था। मैसेज में इसको लेकर किया गया दावा गलत है।


स्पैनिश फ्लूः मैसेज के मुताबिक स्पैनिश फ्लू 1920 में फैला था, जबकि असल में इस महामारी ने 1918 से 1919 के बीच में कहर मचाया था। इस महामारी से दुनिया भर में करीब 50 करोड़ लोग संक्रमित हुए थे, जबकि करीब 5 करोड़ लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। इस महामारी की शुरुआत स्पेन से नहीं हुई थी, फिर भी इसका नाम स्पैनिश फ्लू रखा गया। दरअसल इसकी वजह कुछ और है, वॉशिंगटन पोस्ट के एक आर्टिकल के मुताबिक प्रथम विश्व युद्ध के समय स्पेन ऐसा देश था, जिसने इस महामारी के फैलने की खबर को दबाया नहीं और पूरी ईमानदारी से सबके सामने रखा। बाकी देश इस चक्कर में इस महामारी के फैलने की खबर इसलिए नहीं सार्वजनिक होने दे रहे थे कि उन्हें डर था कि इससे सैनिकों का मनोबल टूटेगा।


फैक्ट चेक


इन महामारियों को लेकर सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप मैसेज में किए गए दावे साल के हिसाब से गलत हैं। पिछली चार सदियों पर नजर डालें तो प्लेग और कोविड-19 महामारी ऐसी रही हैं, जो 1720 और 2020 में फैली हैं, जबकि हैजा और स्पैनिश फ्लू जो दावे किए हैं, उन साल से कुछ साल पहले जैसे हैजा 1817 में और स्पैनिश फ्लू 1918 में फैला था।