लॉकडाउन में घर बैठे-बैठे कैसे और कितने मोटे हो रहे हैं लोग?


लॉकडाउन में घर बैठे-बैठे कैसे और कितने मोटे हो रहे हैं लोग?                                                                                   


 भारत (India) जैसे देशों में एक तरफ, लॉकडाउन (Lockdown) का अंजाम यह है कि लोग भूख से बेहाल हैं या जो मिल जाए, उस पर गुज़ारा कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ, ज़्यादा, हाई कैलोरी और बेतरतीब खाने से एक बड़ी आबादी समस्याओं की शिकार है.


जानिए कि Covid 19 प्रतिबंधों के चलते भारत ही नहीं, दुनिया में लोग कैसे मोटे हो रहे हैं.                                     


कोरोना वायरस (Corona Virus) संक्रमण के कारण हुए लॉकडाउन के चलते खाने पीने की सहूलियतें सीमित हो चुकी हैं. लोग घरों में रहने पर मजबूर हैं और बाहर नहीं जा पा रहे हैं इसलिए कहीं मोटापा (Obesity) बढ़ रहा है तो कहीं इसका खतरा. एक तरफ, पहले ही मोटापे के शिकार मरीज़ परेशान हैं तो दूसरी तरफ, रिटेल सेक्टर (Retail) से पैकेज फूड (Packaged Food) की ज़्यादा बिक्री की खबरें हैं                                                                                                             


 लॉकडाउन के चलते लोगों का सोने जागने का शेड्यूल पूरी तरह बिगड़ चुका है. विकल्प कम होने के कारण ज़्यादा कैलोरी वाले भोजन का सेवन किया जा रहा है और देर रात तक जागने के कारण सुबह का व्यायाम नहीं किए जाने के भी मामले विशेषज्ञ नोटिस कर रहे हैं. कोविड 19 के संक्रमण से बचाव के चक्कर में लोग लाइफस्टाइल बीमारियों जैसे डायबिटीज़, दिल के रोग, हाइपरटेंशन और बीपी की समस्याओं से घिर सकते हैं.                                                                                 



कैसे बढ़ रहा है वज़न?
लॉकडाउन के समय में एक तो चिंताओं और आशंकाओं के चलते लोगों ने घरों में राशन और पैकेज्ड फूड का स्टॉक किया है. दूसरा, वर्क फ्रॉम होम के कारण कई लोग घरों में बेकाबू तरीके से कुछ न कुछ हर समय खा या पी रहे हैं, इनमें पैकेज्ड फूड ज़्यादा है. तीसरे, चिंता और डर के कारण शरीर में जो हॉर्मोन संबंधी प्रक्रियाएं होती हैं, वो भी मोटापे या डायबिटीज़ व बीपी जैसे रोगों का कारण बनती हैं. और, वर्क फ्रॉम होम व इंटरनेट या टीवी देखने में ज़्यादा समय बिताने के कारण सोने जागने का अनुशासन बिगड़ा है.                                                                                                                                        


क्या यह सिर्फ भारत का हाल है?
नहीं. पश्चिमी देशों में भी मोटापे को लेकर बड़ी चिंताएं सामने आई हैं. वेबएमडी पत्रिका ने एक हज़ार अमेरिकी पाठकों के बीच एक सर्वे किया तो पता चला कि कोविड 19 संबंधी प्रतिबंधों के चलते करीब आधी महिलाओं और एक चौथाई पुरुषों ने वज़न बढ़ने की बात मानी. वहीं, अमेरिका से बाहर किए गए सर्वे में शामिल आधे से ज़्यादा पुरुषों और एक तिहाई महिलाओं ने वेट बढ़ने की बात कही. दूसरी तरफ, एक महीने के भीतर 5 लाख से ज़्यादा फेसबुक यूज़रों ने क्वारैण्टीन वेट गेन और क्वारैण्टीन15 जैसे हैशटैग का इस्तेमाल किया.विदेशों में वेट गेन का कारण?


मार्च के आखिरी दो ​हफ्तों में फरवरी की तुलना में अमेरिकियों ने कैंडी 266% ज़्यादा खाई. इसके अलावा ब्रेड 54% औ नूडल्स 36% ज़्यादा खाए गए यानी कार्बयुक्त भोजन के सेवन में इजाफ़ा हुआ. एक और डेटा में बताया गया कि अमेरिकियों ने बेकिंग चीज़ें 40% ज़्यादा खाने की बात कही. दूसरी तरफ, 70% अमेरिकियों और 35% अमेरिका से बाहर के लोगों ने कहा कि वो 'तनाव की वजह से ज़्यादा खा' रहे हैं और वज़न बढ़ रहा है.



कहीं घट भी रहा है वज़न


ऐसा नहीं है कि लॉकडाउन में हर जगह से वज़न बढ़ने के ही समाचार हैं. जो लोग इस समय का इस्तेमाल अपनी फिटनेस और इम्यूनिटी बढ़ाने पर कर रहे हैं, वो वज़न घटाने में कामयाब भी हो रहे हैं. भारत और अन्य कम आय वाले देशों में एक तरफ यह स्थिति भी है कि लोगों के पास खाने तक के लाले पड़े हैं तो दूसरी तरफ, विकसित देशों में डाइट को लेकर जागरूकता की भी खबरें हैं.



लाइफस्टाइल बीमारियों को लेकर चिंता


इन हालात में विशेषज्ञों की बड़ी चिंता यह है कि जो लोग पहले ही मोटापे या उससे जुड़ी बीमारियों के ​गंभीर शिकार थे, लॉकडाउन के कारण उनके सामने बड़ी समस्या खड़ी हुई है. दूसरी तरफ, लॉकडाउन के चलते बेतहाशा खाने पीने और शारीरिक मेहनत कम होने जैसी वजहों से लाइफस्टाइल रोगों का खतरा बढ़ेगा.


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