बिना ठोस संकेत के चीन के साथ नहीं होगी शीर्ष स्तरीय कूटनीतिक वार्ता: भारत


भारत और चीन के बीच सीमा पर जारी तनाव जारी है। इस बीच रूस, चीन और भारत के विदेश मंत्रियों की वर्चुअल बैठक हो रही


भारत वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव कम करने के लिए शीर्ष स्तर पर कूटनीतिक वार्ता के लिए फिलहाल जल्दबाजी में नहीं है। भारत चाहता है कि इस स्तर की बातचीत से पहले बीच का रास्ता निकलने का कोई ठोस संकेत मिले। उसकी निगाहें दोनों देशों के बीच जारी सैन्य स्तर की वार्ता पर है।


सूत्रों का कहना है कि सैन्य स्तर की बातचीत से मिले संकेत से ही भविष्य में शीर्ष स्तरीय कूटनीतिक वार्ता का भविष्य तय होगा। भारत और चीन के बीच 1962 में हुए युद्ध के दौरान रूस (तत्कालीन सोवियत संघ) ने तटस्थ भूमिका निभाई थी। मगर इस बार स्थिति दूसरी है। रूस फिलहाल एलएसी पर तनाव कम करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका में है।


उसकी कोशिश दोनों देशों को कूटनीतिक वार्ता की मेज पर लाने की है। इसलिए मंगलवार को भारत, रूस और चीन के विदेश मंत्रियों की होने वाली बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। हालांकि दोनों ही पक्ष कह रहे हैं कि इस बैठक में कोरोना केंद्रित ही बातचीत होगी।


सरकार के एक सूत्र के मुताबिक, तनाव के चरम पर होने के बावजूद भारत ने कूटनीतिक बातचीत का विकल्प खुला रखा है। 23 जून की बैठक का स्थगित न होना इस बात का महत्वपूर्ण संकेत है। एलएसी पर तनातनी के बावजूद भारत और चीन इस बैठक के लिए सहमत हुए। हालांकि भारत इस दिशा में आगे बढ़ने से पहले फूंक फूंक कर कदम उठा रहा है।


भारत चाहता है कि शीर्ष स्तर पर कूटनीतिक बातचीत का सिलसिला तब शुरू हो जब सैन्य स्तर की जारी बातचीत में एक रोड मैप तैयार हो जाए। इससे कूटनीतिक बातचीत के बाद तनाव खत्म होने की मजबूत संभावना बनेगी। बिना ठोस संकेत के इस तरह की बैठक को भारत तवज्जो नहीं देना चाहता।


नरम रुख का नहीं देना चाहता संकेत
भारत इस पूरे मामले में दोकलम की तर्ज पर आगे बढ़ना चाहता है। दोकलम विवाद के दौरान भारत ने अपना आक्रामक रुख बरकरार रखा था। इससे चीन के पास भारत के न झुकने का संकेत गया। भारत इस बार भी यही रणनीति अपना रहा है।


एलएसी पर उसने किसी भी सूरत में दबाव में नहीं आने का संदेश दिया है। वायु सेना प्रमुख का लद्दाख दौरा, लोकल कमांडरों को अपने स्तर पर कार्रवाई की छूट संबंधी फैसला चीन को पीछे न हटने और दबाव में न आने का संदेश देने के लिए है।


चीन की ओर से हो रही पहल
भले ही चीन एलएसी की दूसरी तरफ सेना का जमावड़ा बढ़ाने के अलावा युद्धक विमानों को बड़ी संख्या में तैनात कर रहा हो मगर सच्चाई यह है कि बातचीत की पेशकश चीन की ओर से ही हो रही है। सैन्य स्तर की वार्ता में नतीजा न निकलने बावजूद ऐसी वार्ता को जारी रखने की पहल भी चीन की ओर से हो रही है। 


 


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