ॐ नमो निषाद अधिपति गुह्य राज निषाद

ॐ नमो निषाद अधिपति गुह्य राज निषादॐ नमो निषाद अधिपति


ॐ नमो निषाद अधिपति गुह्य राज निषाद
   जय महादण्ड नायक भगवंत वीर एकलव्य 
भोई क्षत्रिय, भोई राजपूत, भोई आदिवासी भोई भारत की एक प्राचीन जाति है। यह एक आखेटक आदिवासी जाति है जिसका उल्लेख महाभारत और रामायणजैसे भारत के प्राचीनतम महाकाव्यों में मिलता है। भोई समाज शैव धर्म के अंग है। वर्णाश्रम व्यवस्था में वे निषाद अवर्ग रहे हैं।


भोई वंश ने 1542 से 1559 ई. तक उड़ीसा पर शासन किया। उड़ीसा में इस वंश की स्थापना 'गजपति वंश' के बाद हुई थी। भोई वंश का प्रवर्तक 'गोविन्द विद्यासागर' को माना जाता है, जो उड़ीसा के पूर्ववर्ती शासक प्रतापरुद्र (1497-1540 ई.) का मंत्री था।


गोविन्द विद्यासागर 'भोई' अथवा 'लेखक' वर्ग का था।
इस वर्ग का होने के कारण ही उसका वंश 'भोई वंश' कहलाया।
भोई वंश के इतिहास में केवल तीन राजा हुए।
गोविन्द, उसका पुत्र तथा पौत्र और उनका शासन केवल 18 वर्ष तक ही चल सका।
'मुकुन्द हरिचन्दन' ने भोई वंश का अंत कर दिया।
अन्ततः 1586 ई. में बंगाल के सुल्तान ने उड़ीसा को जीतकर अपने राज्य में मिला लिया।


गुह्य राज निषाद      


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