उद्धव ठाकरे ने कहा-सीएए से किसी को डरने की जरूरत नहीं, राज्य में एनआरसी लागू नहीं होने दूंगा

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बयान दिया के लिए इमेज नतीजेमुंबई.  नागरिकता संशोधन कानून(सीएए) , राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को लेकर राज्य में चल रही असमंजस की स्थिति पर मंगलवार को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने बयान दिया। उन्होंने कहा, 'एनआरसी को राज्य में लागू नहीं होने देंगे। सीएए से किसी को डरने की जरूरत नहीं है और एनपीआर 10 साल में होने वाली जनगणना का एक प्रॉसेस है। हालांकि, इस दौरान उद्धव ने एनपीआर और सीएए लागू करेंगे या नहीं इसको लेकर स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं कहा है। 


सोमवार को राकांपा ने सभी 16 मंत्रियों की आपात बैठक भी बुलाई थी


दरअसल, यह पूरा मामला तीन दिन पहले शुरू हुआ था। तब राज्य की जनगणना अधिकारी ने जिलों के कलेक्टर और निगम प्रमुखों के साथ एनपीआर लागू करवाने की तैयारियों को लेकर चर्चा की थी। तब यह माना गया कि उद्धव ठाकरे ने राज्य में एनपीआर लागू करने की अनुमति दे दी। हालांकि, मीडिया में खबर आने के बाद राकांपा प्रमुख और महाराष्ट्र विकास अघाड़ी सरकार में सहयोगी शरद पवार ने नाराजगी व्यक्त की थी। इसके बाद सोमवार को राकांपा ने सभी 16 मंत्रियों की आपात बैठक भी बुलाई थी। माना जा रहा है कि राकांपा के इस रूख के बाद इस मामले में उद्धव ठाकरे ने यह बयान दिया है।


'सीएए, एनआरसी और एनपीआर तीनों अलग-अलग चीजें हैं'


उद्धव ने मीडिया के साथ बातचीत में कहा, 'सीएए, एनआरसी और एनपीआर तीनों अलग-अलग चीजें हैं। किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं हैं। हम राज्य में एनआरसी लागू नहीं करने जा रहे हैं। सीएए से राज्य के किसी भी नागरिक को घबराने की कोई जरूरत नहीं है। एनपीआर हर 10 साल में होने वाली जनगणना का प्रॉसेस भर है और एनआरसी मैं महाराष्ट्र में लागू होने नहीं दूंगा।'


वहीं इस मुद्दे पर फिर एक बार राकांपा प्रमुख शरद पवार ने कहा,'इस (एनपीआर, सीएए और एनआरसी) मुद्दे पर उद्धव जी का अपना मत हो सकता है, लेकिन राकांपा ने इसके खिलाफ संसद में वोट किया है।