मरकज में कोरोना / तब्लीगी जमात के मौलाना साद का ऑडियो वायरल: कहा था- मुसलमानों को मुसलमानों से अलग करने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग प्रोग्राम बनाया गया

निजामुद्दीन के मरकज में भारत समेत कई देशों के हजारों लोग इकट्ठा हुए थे। लॉकडाउन के बाद भी यहां 2 हजार लोग ठहरे हुए थे।



  • सोशल मीडिया पर एक ऑडियो वायरल हो रहा है, यह ऑडियो तब्लीगी जमात के चीफ मोहम्मद साद कंधलावी का बताया जा रहा

  • साद इस ऑडियो में लोगों को मिलना-जुलना बरकरार रखने, साथ बैठकर खाने और मस्जिदों में ही नमाज पढ़ने को कह रहे हैं




  • नई दिल्ली. निजामुद्दीन इलाके में हुए इस्लामिक धार्मिक आयोजन (तब्लीगी जमात मरकज) के बाद एक ही बिल्डिंग में ठहरे सभी 2,361 लोगों को निकाल लिया गया है। 617 लोगों को हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है और बाकी लोगों को क्वारैंटाइन किया गया है। इनमें से 24 लोग कोरोना पॉजिटिव भी पाए गए हैं। इन सब के बीच तब्लीगी जमात के मुखिया मोहम्मद साद का एक कथित ऑडियो वायरल हो रहा है। इसमें वे सरकार द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग के आदेश को मुस्लिम समुदाय के खिलाफ एक साजिश बता रहे हैं।


    "अल्लाह पर यकीन न रखने वालों की चाल और स्कीमें आ गईं"


    वायरल ऑडियो में साद कह रहे हैं, "अल्लाह पर यकीन न रखने वालों की चाल और स्कीमें मुसलमानों को बीमारी से बचाने के बहाने से मुसलमानों को रोकने के लिए आ गई हैं। उन्हें मुसलमानों को रोकने और बिखेरने की तरकीब नजर आ गई है ताकि इनके दिल में हमेशा के लिए ये बात बैठ जाए कि किसी के पास मत जाओ, किसी के पास मत बैठो नहीं तो बीमारी लग जाएगी। आज अगर इस बीमारी की वजह से मुसलमानों के अकीदत बदल जाते हैं तो बीमारी तो खत्म हो जाएगी, लेकिन अकीदत खत्म नहीं होगी।"


    ऑडियो में साद आगे कहते हैं, "ये बीमारी बदल जाएगी, लेकिन तुम्हारे माशरे के आदाब, तुम्हारे साथ बैठना, एक प्लेट में खाना, इसका असर मुद्दतों के आसारे कभी खत्म ना हो। ये तो मुसलमानों के दरमियां शक पैदा करने, इनके दरमियां मोहब्बत खत्म करने के लिए एक प्रोग्राम तैयार किया गया है, एक प्रोग्राम बनाया गया है कि मुसलमानों को मुसलमानों से अलग करने के लिए ये बहाना अच्छा है।"


    "जब अल्ला ताला ने बीमारी मुकद्दर कर दी तो किसी डॉक्टर या दवा के साथ मैं कैसे बच सकूंगा"


    साद यह भी कहते हैं कि "मौत से भागकर जाओगे कहां, मौत तो तुम्हारे आगे-आगे चल रही है। इसलिए जरा इस मौके पर अपनी अकल-समझ को जरा ठिकाने रखो। ऐसा ना हो कि महज डॉक्टरों की बातों में आकर नमाजें छोड़ो, मुलाकातें छोड़ो, मिलना-जुलना छोड़ो। 70 हजार फरिश्तों पर तुम क्यों नहीं यकीन रखते। जब अल्ला ताला ने बीमारी मुकद्दर कर दी तो किसी डॉक्टर या दवा के साथ मैं कैसे बच सकूंगा, क्या कर लूंगा जब 70 हजार फरिश्ते मुझे नहीं बचा पाए। अछूत बनना, अछूत बनाना, खौफ फैलाना, ये इसका वक्त नहीं है। क्यों इस बात का यकीन आ गया कि हम मिलेंगे तो बीमारी फैलेगी, इसका यकीन क्यों नहीं है कि हम मस्जिदों में जमा होंगे तो अल्ला ताला इस समय में फरिश्तों को हाजिर करेंगे।"


    "मस्जिद में आने से आदमी मरता भी है तो इससे बेहतर मरने की जगह कोई और नहीं हो सकती"


    साद कहते हैं, "ये खयाल बिलकुल बेकार खयाल है कि मस्जिद में जमा होने से बीमारी पैदा होगी। मैं कहता हूं कि अगर तुम्हें यह दिखे कि मस्जिद में आने से आदमी मर जाएगा तो इससे बेहतर मरने की जगह कोई और नहीं हो सकती। साहबान तमन्ना करते थे कि काश नमाज करते हुए मौत आए। इन्हें नमाज में खतरा नजर आ रहा है। अल्लाह बीमारी लाए हैं मस्जिदों को छोड़ने की वजह से। ये बीमारी हटा रहे हैं मस्जिदों को छोड़कर। सोचिए तो सही कितनी उल्टी सोच है। आदमी यह कहे कि मस्जिदों को बंद कर देना चाहिए, इनमें ताला लगा देना चाहिए, इससे बीमारी बढ़ेगी। इस खयाल को दिल से निकाल देना चाहिए।"


    28 मार्च से गायब हैं मौलाना साद


    दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में लॉकडाउन के पहले तब्लीगी जमात का मरकज लगा हुआ था। यहां देश-विदेश से 5 हजार से ज्यादा लोग आए थे। ज्यादातर लोग मरकज खत्म होने के बाद अपने-अपने घर चले गए लेकिन 2000 से ज्यादा लोग मस्जिद की बिल्डिंग में ही ठहरे हुए थे। देश में लॉकडाउन के ऐलान के बाद इस तरह लोगों का इकट्ठा होना अपराध है। दिल्ली पुलिस ने मुहम्मद साद समेत मरकज के 6 अन्य आयोजकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। हालांकि मौलाना साद मौलान 28 मार्च से ही गायब बताए जा रहे हैं।




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