विश्व स्वास्थ्य संगठन के फंड रोकने के ट्रंप के फैसले के खिलाफ शुरू हुई जांच


वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation) के फंड (fund) को रोकने की फैसले की जांच शुरू हो गई है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय की हाउस कमिटी ने ट्रंप के फैसले की जांच शुरू कर दी है. सोमवार को टॉप डेमोक्रेट के पैनल ने इस बारे में घोषणा की.


हाउस फॉरेन अफेयर्स कमिटी के चेयरमैन इलियट एंगेल ने इस बारे में विदेशमंत्री माइक पॉम्पियो को चिट्ठी लिखी है. विदेश मंत्रालय से कहा गया है कि वो विश्व स्वास्थ्य संगठन के फंड रोकने के फैसले से संबंधित सारे रिकॉर्ड उपलब्ध करवाए.


खत में कमिटी ने की ट्रंप के फैसले की आलोचना


चेयरमैन ने कहा है कि विदेश मंत्रालय एजेंसी, व्हाइट हाउस और संबंधित इंस्टीट्यूशन के बीच हुए कम्यूनिकेशन की जानकारी दे और बताए कि किस कानूनी आधार पर ऐसा फैसला लिया गया.


एंगेल ने अपने खत में विश्व स्वास्थ्य संगठन को परफेक्ट संगठन नहीं माना है. लेकिन उन्होंने कहा है कि महामारी के वक्त में जब पूरी दुनिया संकट के दौर से गुजर रही है और लाखों जिंदगियां दांव पर लगी हैं, ऐसे वक्त में संगठन के फंड को रोका जाना, लोगों की जिंदगी को खतरे में डालने वाला फैसला है.


एंगेल ने विदेश मंत्रालय को 4 मई तक सारे दस्तावेज उपलब्ध करवाने को कहा है.


अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने 14 अप्रैल को रोक दी थी WHO की फंडिंग


14 अप्रैल को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की फंडिंग रोकने का ऐलान किया था. फंडिंग को 60 से 90 दिनों के लिए रोकने का ऐलान किया गया था. संगठन की लीडरशिप और कोरोना वायरस के प्रति उसकी प्रतिक्रिया के बाद उसका रिव्यू किया जाना था.


अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने विश्व स्वास्थ्य संगठन पर आरोप लगाया था कि उसकी नीतियां चीन केंद्रित है. उन्होंने कहा था कि संगठन महामारी को फैलने से रोकने में चीन की जिम्मेदारी की पहचान करने में नाकाम रहा. चीन के वुहान शहर से ही सबसे पहले कोरोना का संक्रमण सामने आया था. इसके बाद ये पूरी दुनिया में फैला.


एंगेल ने अपने खत में लिखा है कि महामारी से निपटने की बजाए विश्व स्वास्थ्य संगठन को इसके लिए जिम्मेदार ठहराकर हालात को और खराब किया गया.


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