इस दवा पर टिकी दुनिया की उम्मीद, क्या कोरोना से जंग में 'संजीवनी' साबित होगी रेमडेसिविर?


कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में एंटी वायरल दवा रेमडेसिविर की भूमिका अहम बताई जा रही है। क्लिनिकल ट्रायल के तीसरे फेज में इस दवा के सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद दुनिया की निगाहें अब इस दवा पर टिक गई हैं। अमेरिका के एफडीए यानी खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने कोरोना महामारी के इलाज में आपातकालीन स्थिति में दवा का प्रयोग करने की अनुमति दे दी है। एफडीए प्रमुख स्टेफन हान ने शुक्रवार को इसकी घोषणा करते हुए एक दवा कंपनी को आपूर्ति की प्रक्रिया पूरी करने के लिए अधिकृत भी कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस दवा से बहुत उम्मीद है। और केवल अमेरिका ही नहीं, इस महामारी से जूझ रहे कई देशों को एक उम्मीद की किरण दिखी है। अब सवाल यही है कि क्या रेमडेसिविर दवा कोरोना के खिलाफ 'संजीवनी' साबित होगी!


इबोला के इलाज में हुई थी कारगर 
रेमडेसिविर एक एंटी वायरल दवा है, जिसे इबोला के इलाज के लिए बनाया गया था। इसे अमेरिकी फार्मास्युटिकल गिलीड साइंसेज ने बनाया है। बीते फरवरी में यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शस डिसीज ने इस दवा का कोविड-19 के इलाज के लिए ट्रायल करने की बात कही थी। सार्स और मर्स जैसे वायरस के खिलाफ एनिमल टेस्टिंग में भी इस दवा ने बेहतर परिणाम दिए थे। 


रेमडेसिविर के क्लिनिकल ट्रायल के बाद यह बात सामने आई है कि इस दवा ने कोरोना मरीजों की स्थिति में सुधार होने के समय को पांच दिन कम कर दिया है। इसका मतलब है कि कोरोना के मरीज की रिकवरी अब अपेक्षाकृत पांच दिन पहले होने लगती है। अमेरिका में कोरोना के इलाज में इस दवा का ट्रायल करनें वाली दवा कंपनी के सीईओ डेनियल ओ डे ने दवा की आपूर्ति को लेकर प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने अमेरिकी सरकार के साथ मिलकर सकारात्मक सहभागिता की बात कही है। 


दवा कंपनी ने इस ट्रायल में करीब 1000 कोरोना मरीजों को शामिल किया था। इन मरीजों को दो समूह में अलग कर रेमेडेसिविर और प्लेसिबो दी गई। अध्ययन के दौरान पता चला कि रेमडेसिविर वाले मरीज, प्लेसीबो वाले मरीजों की तुलना में जल्दी से ठीक हो गए। जिन मरीजों को रेमडेसिविर दी गई, उनकी रिकवरी 31 फीसदी तेजी से हुई। इस बारे में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शस डिसीज के निदेशक एंथोनी फॉसी का कहना है कि 100 फीसदी सुधार की जगह 31 फीसदी तेजी से सुधार बहुत बेहतर परिणाम नहीं है, लेकिन यह अहम है। कम से कम यह तो साबित हो ही रहा कि यह दवा इस वायरस को रोक सकती है।


स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मेडिसिन में क्लिनिकल प्रोफेसर और अग्रणी शोधकर्ता अरुणा सुब्रह्मण्यन के मुताबिक इस दवा के तत्कालीन परिणाम उत्साह बढ़ाने वाले हैं। जिन मरीजों ने रेमडेसिविर दवा का पांच दिन तक सेवन किया, उनकी हालत में 10 दिन तक दवा का सेवन करने वालों की तरह ही सुधार हुआ। प्रो. अरुणा के मुताबिक ट्रायल के परिणाम अगर सुरक्षित और प्रभावी साबित होते हैं कि यह समझने में मदद मिलेगी कि इलाज में इस दवा का किस तरह प्रयोग किया जाए।


मेडिकल रिसर्च जर्नल में प्राकशित एक स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड-19 के उपचार में एंटी वायरल दवा रेमडेसिविर के पहले औचक परीक्षण में ज्यादा लाभ नहीं मिले हैं। अध्ययन करने वाले चाइना-जपान फ्रेंडशिप हॉस्पिटल और कैपिटल मेडिकल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस स्टडी में 237 लोगों को शामिल किया गया था। इस दवा को मूलत: इबोला के इलाज के लिए विकसित किया गया था। हालांकि उन्होंने कहा कि इस दवा में विषाणुओं को शरीर के भीतर अपने प्रतिरूप बनाने से रोकने की क्षमता है। फिलहाल दुनिया की उम्मीद इस दवा पर टिकी हुई है।


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